कभी-कभी बउराओ यार !
कभी-कभी पगलाओ यार !
कभी-कभी बउराओ यार ! कभी-कभी पगलाओ यार !
झिझक जनेऊ तोड़ खडे़ हो, हन-हन घनो कि कसै लुहार
गूँगे-बहरे सरजी, किसका-किसका पियाज कतरें
’क’ वर्णी संज्ञाओं को लुइहाओ लानत भेजो
फ़िफ़्थ फ़्लोर की खिड़की से कुछ ताको और खजुआओ
तेज करो थूथुन की बत्ती, कभी-कभी कुछ गाओ
कागज का यह कुआँ, घड़े ! शंकाएँ फिर भी रह जाएँगी
यही किताबें ! यही किताबें !! एकदिन तुमको खा जाएँगी